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अकेला,डरता,पर आगे बढ़ताआगे क्या मोड़ ले राह यह सोच कर सिहरता अकेला, डरता,पर आगे बढ़ता कुछ जोड़ताकुछ तोड़ताकुछ देखकर मुख मोड़ता कुछ पा लेताकुछ छोड़ताहूं राह में बस दौड़ता अकेला, डरता,पर आगे बढ़ता कुछ...
तुम्हारे जाने के बादजैसा था वैसा ही रखा हैघरवो उखड़ा प्लास्टरदीवारों पर तुम्हारेहाथों से किए निशानसब वैसे ही रख छोड़े हैतुम्हारी गाड़िया तुम्हारे खिलौनेसब रखे है संभाल क्योंकिमुझे पता है तुम्हे आना है...
एक छोटे कस्बे में,शाम ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। एक घर के बाहर कुछ बच्चियां लगड़ी टांग खेल रही हैं। एक दो तीन चार (गिट्टियां फेकने और खिलखिलाने की आवाजें) मां ( अंदर घर से)पाती! ओ पाती ! आओ घर...
एक प्यारी सुहानी सुबह, बड़े से पार्क के बाहर,एक 5-6 साल की लड़की सुंदर से कपड़ों में अपने पिता के साथ खड़ी है,पिता फटे पुराने गंदे कपड़ों में हैउसके हाथ में एक पुराना झोला है। लड़की(आश्चर्य से)हा!!!!...
जिंदगी क्या ही हैमुझको बहती नदी सी लगेधूप भी है छांव भीबस तेरी कमी सी लगे जिंदगी क्या ही हैमुझको बहती नदी सी लगेधूप भी है छांव भीबस तेरी कमी सी लगे पहाड़ भी है वादियां नदी भी है और पेड़ भीहवा भी है...
ये बहता दरिया भी काफी नहीं हैजो मेरे अंदर ही बाकी नहीं हैतेरी यादें आती हैं सागर की लहरों सीअंदर से मुझको हिलाती सी रहती सी मैं मिटता सा रहताथोड़ा साथोड़ा सामिट के सवरता थोड़ा साथोड़ा सा बिखरता सा...
गणपति हो गणपतिहे विघ्नहर्ता गणपतिकरते है हम प्रार्थना येविघ्न हरना गणपति गणपति हो गणपति रिद्धि सिद्धि सारी विद्याआते है तुमसे सभीतुमसे पूरी कामना होचाहे छोटी या बड़ी गणपति गणपति हो गणपति हे गजानन...
चांद तारे सारे के सारेआ जाओ मुट्ठी में,तुमको सुनाऊं एक कहानी गर्मी की छुट्टी में, चांद तारे सारे के सारेआ जाओ मुट्ठी में,तुमको सुनाऊं एक कहानी गर्मी की छुट्टी में, छोटा सा कछुआ और एक खरगोशरहते थे जंगल...
करनी है तुमसे बातें कईकितने ही दिन बीते राते कईनींदों में , ख्वाबों में आती हो तुमसामने मेरे आओ कभी करनी है तुमसे बातें कईकितने ही दिन बीते राते कई देखो मुझे तुम देखूं तुम्हेखोया हुआ हूं मैं तो...
