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अकेला

अकेला,
डरता,
पर
आगे बढ़ता
आगे क्या मोड़ ले राह
यह सोच कर सिहरता

अकेला,
डरता,
पर
आगे बढ़ता

कुछ जोड़ता
कुछ तोड़ता
कुछ देखकर मुख मोड़ता
कुछ पा लेता
कुछ छोड़ता
हूं राह में बस दौड़ता

अकेला,
डरता,
पर
आगे बढ़ता

कुछ खोकर
हूं कुछ ढूंढता
कुछ ढूंढकर
फिर गूंथता
कुछ पूछता
फिर बूझता
फिर इन सबसे
ही हूं जूझता

अकेला,
डरता,
पर
आगे बढ़ता
आगे क्या मोड़ ले राह
यह सोच कर सिहरता

अकेला,
डरता,
पर
आगे बढ़ता

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