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बंधन-मुक्ति

पतंगे !उड़ती फिरती बहती जातीजैसे जड़ रहितचंचल उड़ान,स्पर्श पवन का और बढ़ाता जिज्ञासादेखें, छूं लें सारा आसमान। पर बंधी कहीं हैं यें भी डोर सेलगता उनको बंधन ये,काश ये डोरी टूटे तो मुक्त गगन की हो लें...

नया साल

 नया साल कुछ नया नहीं,कुछ बचा रहा कुछ बचा नहींकुछ पास रहे कुछ पास नहीं कुछ भूल गए कुछ याद नहींनया साल कुछ नया नहीं कुछ सोचा था कुछ किया नहीं, कुछ पाया था पर रहा नहीं, कुछ ख्वाब से थे कुछ आस सी थी, कुछ...

कूड़े का ढेर

नींद बड़ी अच्छी आती है जब मैं अपने घर सोता हूं पर थोड़ी खुशबू आती है जब मैं अपने घर सोता हूं। एक नदी भी जाती है छोटी छोटी मछली आती है तारो का भी लगता मेला दिन में सूरज से होता उजेला  हवा भी अच्छी आती...

ये शहर मेरा नही है।

भागता दौड़ता राह को रौंदता कुछ मिल गया राह में कुछ पीछे अपने छोड़ता  यहां कोई भी ठहरा नही है ये शहर मेरा नही है। भीड़ की दीवार है आपाधापी बेशुमार है सुबह भी चल रहे थे सांझ भी डेरा नही है। ये शहर मेरा...

चाट की दुकान

गुलाबी सर्दी ने अपनी दस्तक देनी शुरू कर दी थी। लखनऊ की हल्की सर्द भरी शाम तहजीब के साथ अपने चाहने वालों को अपने दीदार के लिए आमंत्रित कर रही थी। मैने भी उसका आमंत्रण स्वीकार कर लिया था और एक हॉफ...

बस इतनी सी बात हो

बस इतनी सी बात हो  देखूँ तुझे  तू भी देख ले  चाहे कैसे भी हलात हो बस इतनी सी बात हो चाहे धूप हो या छांव हो  या घनघोर अँधेरी रात हो बारिश की बूंदो का सावन जाड़े कि सर्दी की शीतन उगते सूरज की बेला हो या...

तुझमें कुछ तो बात है

 कभी नम हैं आंखे कभी हैं चमकती कभी गुम हैं लब कभी बाते खनकती मुख के हर एक भाव का अलग अंदाज है तुझमें कुछ तो बात है कभी है अटकती कभी है चहकती कभी शिखर कभी शून्य मे भटकती मन में समेटे ना जाने कितने राज...

चंद्रमा

 ऐ चन्द्र तुम्हारी किरणों में  सब कुछ निर्मल सा लगता है  सब कहते है कि अंधकार है पर मुझको तो सब ही दिखता है।    रूप रंग का भेद मिटा कर  तुम सबको सम कर देते हो  दिन भर की जितनी पीड़ा हो  सबको तुम हर...

सोचा कुछ तो लिख ही दूंगा

 हुई शाम थी, बैठा एक दिन सोचा कुछ तो लिख ही दूंगा मन हि मन में चलने वाली दिल हि दिल में रहने वाली कुछ बातो को काग़ज़ पर तो मै रख ही दूंगा सोचा कुछ तो लिख ही दूंगा सब द्वेष,घृणा,अपकार,क्रोध मन के सारे...