मक़ाम-ए-ज़फ़र
जुल्फ़ें सर्द हो चलीं अब तक हमसफ़र न मिला कोई मिला भी तो दो वक़्त मुसलसल न मिला ये असर है तेरी रहनुमाई का आलिम बग़ीचा जो दिखा था दूर…
जुल्फ़ें सर्द हो चलीं अब तक हमसफ़र न मिला कोई मिला भी तो दो वक़्त मुसलसल न मिला ये असर है तेरी रहनुमाई का आलिम बग़ीचा जो दिखा था दूर…
अकेला,डरता,पर आगे बढ़ताआगे क्या मोड़ ले राह यह सोच कर सिहरताअकेला, डरता,पर आगे बढ़ताकुछ जोड़ताकुछ तोड़ताकुछ देखकर मुख मोड़ता कुछ पा लेताकुछ छोड़ताहूं राह में बस दौड़ताअकेला, डरता,पर आगे बढ़ता…
तुम्हारे जाने के बादजैसा था वैसा ही रखा हैघरवो उखड़ा प्लास्टरदीवारों पर तुम्हारेहाथों से किए निशानसब वैसे ही रख छोड़े हैतुम्हारी गाड़िया तुम्हारे खिलौनेसब रखे है संभाल क्योंकिमुझे पता है…
जिंदगी क्या ही हैमुझको बहती नदी सी लगेधूप भी है छांव भीबस तेरी कमी सी लगेजिंदगी क्या ही हैमुझको बहती नदी सी लगेधूप भी है छांव भीबस तेरी कमी सी…
ये बहता दरिया भी काफी नहीं हैजो मेरे अंदर ही बाकी नहीं हैतेरी यादें आती हैं सागर की लहरों सीअंदर से मुझको हिलाती सी रहती सीमैं मिटता सा रहताथोड़ा साथोड़ा…
गणपति हो गणपतिहे विघ्नहर्ता गणपतिकरते है हम प्रार्थना येविघ्न हरना गणपतिगणपति हो गणपति रिद्धि सिद्धि सारी विद्याआते है तुमसे सभीतुमसे पूरी कामना होचाहे छोटी या बड़ीगणपति गणपति हो गणपति हे…
करनी है तुमसे बातें कईकितने ही दिन बीते राते कईनींदों में , ख्वाबों में आती हो तुमसामने मेरे आओ कभी करनी है तुमसे बातें कईकितने ही दिन बीते राते कईदेखो…
दीवानगी की हद तक तुझको मैं चाहूं तब तक दुनिया क्या है जमाना लड़ जाऊ मैं तो रब तक तुझसे करूं मोहब्बत है सांस मेरी जब तक दिल से…
आंखें तुम्हारीकरती हैं बातें दिल ये है कहता लबों पे आ केतुमसे मिला था जब मैंतेरा ही हो गया थाजुड़ने लगी थी किस्मतदिल भी मेरा जुड़ा थासांसे तुम्हारी आते जातेखींचे…
आंखें तुम्हारीदेखो ये मुझपेआके हैं पड़तीघड़ी घड़ी नज़रे बचा केजाऊं मैं कैसेतुम हो यहां पेखड़ी खड़ी आंखें ......बड़ी बड़ी मुझपे ......पड़ी पड़ी आंखें ...... बड़ी बड़ी मुझपे ......पड़ी पड़ी बातें…