एक साधारण सा दिन था।
घर के अंदर, बिस्तर पर लेटा हुआ कुंज अपनी दुनिया में मस्त था।
कुंज की उम्र ढाई महीने थी।
उसकी जिंदगी में सिर्फ तीन काम थे।
दूध पीना।
सोना।
और बिना वजह मुस्कुराना।
कभी पंखे को देखकर हंस देता, कभी दीवार को देखकर।
मां
अरे वाह! मेरा राजा बेटा तो आज बहुत खुश है।
कुंज खिलखिला देता है।
तभी…
कमरे के बाहर से छोटे-छोटे कदमों की आवाज आती है।
ठप… ठप… ठप…
कुंज का चेहरा अचानक बदल जाता है।
उसकी आंखें बड़ी हो जाती हैं।
हाथ-पैर तन जाते हैं।
जैसे किसी ने खतरे का अलार्म बजा दिया हो।
क्योंकि दरवाजे पर खड़ा था…
भरत।
भरत की उम्र ढाई साल थी।
और कुंज के हिसाब से वह दुनिया का सबसे बड़ा गुंडा था।
भरत (खुश होकर)
बेबीईईई…!!
कुंज मन ही मन
हे भगवान! फिर आ गया।
भरत दौड़कर बिस्तर पर चढ़ जाता है।
मां
भरत! प्यार से…
लेकिन तब तक भरत कुंज का पैर पकड़ चुका होता है।
भरत
ये क्या है?
मां
पैर है बेटा।
भरत
अच्छा…
और फिर उसे ऐसे खींचने लगता है जैसे मूली उखाड़ रहा हो।
कुंज जोर-जोर से रोने लगता है।
कुछ देर बाद…
कुंज फिर से शांत हो जाता है।
लेकिन उसका डर खत्म नहीं होता।
अब हालत ये हो गई थी कि भरत कमरे में घुसे भी नहीं और कुंज पहले से ही घबराने लगे।
एक दिन कुंज आराम से लेटा हुआ था।
अचानक उसने दूर से भरत को अपनी तरफ आते देखा।
भरत अभी पूरे दस कदम दूर था।
लेकिन कुंज ने खतरा पहचान लिया।
उसने तुरंत रोना शुरू कर दिया।
मां दौड़कर आई।
मां
क्या हुआ?
भरत
मैंने तो कुछ किया ही नहीं।
मां
अभी तक नहीं किया, लेकिन करने वाले थे।
भरत मुस्कुरा देता है।
एक दिन कुंज ने फैसला किया।
अब बहुत हो गया।
आज भगना पड़ेगा।
भरत उसकी तरफ बढ़ रहा था।
कुंज ने अपनी पूरी ताकत लगा दी।
वो दाएं मुड़ा।
फिर बाएं मुड़ा।
फिर पूरे शरीर को घुमाने की कोशिश की।
चेहरा लाल हो गया।
पसीना आ गया।
इतिहास रचा जा रहा था।
आखिरकार…
वह दो इंच आगे सरक गया।
कुंज मन ही मन
हाँ! बच गया!
तभी ऊपर से आवाज आई।
भरत
मिल गया!
और फिर उसने कुंज का मोजा खींच लिया।
कुंज की सारी मेहनत बेकार हो गई।
कुछ दिनों बाद…
दादी ने एक अजीब बात नोटिस की।
मां कमरे में आए।
कुंज मुस्कुराए।
पापा आए।
कुंज मुस्कुराए।
दादी आए।
कुंज खिलखिलाए।
लेकिन जैसे ही भरत कमरे में आया…
कुंज का चेहरा उतर गया।
दादी हंसने लगी।
दादी
अरे ये तो पहचानने लगा है कि आफत कौन है।
सब लोग हंसने लगे।
एक दिन भरत बहुत प्यार से कुंज के पास आया।
सबको लगा आज कुछ अच्छा होगा।
भरत धीरे से कुंज के सिर पर हाथ फेरता है।
मां खुश हो जाती है।
मां
वाह! मेरा बेटा कितना प्यार करता है अपने भाई से।
भरत
हां…
फिर उसने झुककर कुंज के गाल पर एक प्यार वाली पप्पी दी।
सब भावुक हो गए।
लेकिन अगले ही सेकंड…
भरत
अब काटूं?
मां
भरत !!!!
पूरा घर हंसी से गूंज उठा।
कुंज ने आसमान की तरफ देखा।
जैसे भगवान से शिकायत कर रहा हो।
कुंज मन ही मन
भगवान जी, मुझे जल्दी बड़ा कर दो।
मुझे भी इस भरत से हिसाब बराबर करना है।
लेकिन फिलहाल…
दूध पीकर सो जाना ही बेहतर है।

Very good thought about a child
Very good story