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फिल्मों के ही सपने देखते-देखते अगले दिन आंख खुली। उस दिन तो सुबह से ही फिल्म दिखाई जानी थी, पर ऑफिस होने के कारण शाम को ही जा सका। पहली मूवी जो दिखाई गई थी वह थी “एट लास्ट वी सेड गुड बाय”...
पिछले रविवार की सुबह साइकिल की सैर करते हुए मन हुआ कि आज किसी नए रास्ते का रुख किया जाए तो चलाते-चलाते साइकिल दूसरी तरफ मोड़ ली। रास्ता अनजान था, पर शहर तो अपना ही था और ये तो कहा ही जाता है कि दुनिया...
हट! हट यहाँ से!पता नहीं कहाँ-कहाँ से चले आते हैं। खुद तो गंदी हो और मुझे भी गंदी किए जा रही हो। कभी आईने में अपनी शक्ल देखी है? कभी ऐसी रंगत और चमक देखी है? वैसे तो मैं यहाँ आती ही नहीं, पर न जाने...
जून की लू के थपेड़ों से भरी हुई दोपहर, सीमेंट की चादर से बनी छत की दरार से आती हुई धूप मनोज के चेहरे पर पड़ती हुई उसकी नीद में खलल डाल रही थी। बीच-बीच में सफेद बदल आकर उसकी तीव्रता को कम जरूर कर देते...
“पहला” शब्द कितना मनमोहक होता है, जिसके आगे लगता है उसके महत्व को बढ़ा देता है, अब चाहे वह पहला काम हो, कार हो, घर हो या कुछ और।यहां बात है लोकसभा इलेक्शन में मेरी पहली ड्यूटी की।बैंक में...
शुरुआत का समय, सोचा लिखना चाहिए, विचार तो बहुत मन में आते है पर क्या-क्या पता नहीं । बड़े अजीबो- गरीब, स्वप्न भी कहानी या चलचित्र के समान प्रतीत होते। आनंद तो बड़ा आता है पर क्या ये सभी लिखने योग्य...
गुब गुब गुब गुब्बारेदेखो देखो है ये कितने सारेगुब गुब गुब गुब्बारेदेखो देखो है ये कितने सारे कुछ कुछ कुछ नीचे पड़े हैंकुछ कुछ कुछ ऊंचे उड़ चले हैसंग संग चलते ये हमारेगुब गुब गुब गुब्बारेदेखो देखो है...
हाथी राजा हाथी राजातुम हो कितने बड़े,नाक तुम्हारी लंबी -लंबीखंबे जैसे खड़े|गोल -गोल सी आंखे है ये पंखों जैसे कानइस दुनिया में होगा क्याकोई ऐसा बलवान|दांत तुम्हारे लंबे -लंबेझाड़ू जैसी पूंछबाल तुम्हारे...
जो मिल गया है तू ,सुकून हैजो न मिले भी तो ,सुकून है तेरे ख्यालों में,तेरे ही साथ में,तेरी ही बातों में सुकून है।जो न हो बाते भी ,सुकून है।सुकून है सुकून है सुकून हैजो मिल गया है तू, सुकून हैजो न मिले...
