रात

हज़ारों तारे है चांद भी हैफिर भी अंधेरा हैऐ जिन्दगी इस रात का क्या कोई सवेरा है  चल रहा है हर कोई  आंख मूंदे ना दो आवाज यहां हर शख्स बहरा है  अके मिलती…

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चुलबुली सी

चुलबुली सी बुलबुली सी कभी मुरझाई कभी खिलखिली सीफूल सी अनेक रंग कीकभी अचल कभी जल तरंग सीवो है कठिन कभी वो सरल सीकभी एक युग कभी एक पल सीकभी नासमझ कभी वो…

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रात अंधेरी

ये जो रात अंधेरी काली हैवो मैंने भी तो काटी है कुछ रखी है कुछ बाटी हैपर मैंने भी तो काटी हैजब शाम हुई तब से सोचा थासूरज तो एक दिन…

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