चुलबुली सी

चुलबुली सी बुलबुली सी कभी मुरझाई कभी खिलखिली सीफूल सी अनेक रंग कीकभी अचल कभी जल तरंग सीवो है कठिन कभी वो सरल सीकभी एक युग कभी एक पल सीकभी नासमझ कभी वो…

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रात अंधेरी

ये जो रात अंधेरी काली हैवो मैंने भी तो काटी है कुछ रखी है कुछ बाटी हैपर मैंने भी तो काटी हैजब शाम हुई तब से सोचा थासूरज तो एक दिन…

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