लखनऊ मेट्रो

‘आज तो ऑफिस के लिए लेट हो जाऊंगा’कहते हुए मैं मुंशीपुलिया मेट्रो स्टेशन के बाहर बनी एस्केलेटर की सीढ़ियों पर तेजी से चढ़ने लगा। चूंकि मैं लेट हो रहा था…

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चूहा

ताला बंद हो चुका था।ऊषा आंटी ने धीरे से अपनी कमर को घुमाया, ‘घर्र-घर्र-कट’ की आवाज जोर से आई, आवाज को सुन सभी सजग हो गए, पर फिर उन्हें ध्यान…

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भूख

कल भी कुछ खाने को नसीब नहीं हुआ था, और आज? आज भी दोपहर आधी से ज्यादा बीत चुकी थी, पर कुछ भी नहीं मिला था। और ये दोपहर! ये…

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बारिश (भाग-2)

बिजलियां ऐसे चमक रहीं थीं जैसे डिस्को लाइट। फोन उठाकर देखा, उसमें नेटवर्क का कोई नामोनिशान नहीं था। मन में सोचा—बारिश ही तो है, अभी बंद हो जाएगी। चलो, मौसम…

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बारिश (भाग -1)

ये हूं मैं! एक मिनट, आप मुझे देख तो नहीं पा रहे होंगे, मुझे ही अपना विवरण देना होगा। हां तो ये हूं मैं—चढ़ी हुई आँखें, बढ़ी हुई तोंद और…

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अकेला

अकेला,डरता,पर आगे बढ़ताआगे क्या मोड़ ले राह यह सोच कर सिहरताअकेला, डरता,पर आगे बढ़ताकुछ जोड़ताकुछ तोड़ताकुछ देखकर मुख मोड़ता कुछ पा लेताकुछ छोड़ताहूं राह में बस दौड़ताअकेला, डरता,पर आगे बढ़ता…

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जैसा तुमने छोड़ा था

तुम्हारे जाने के बादजैसा था वैसा ही रखा हैघरवो उखड़ा प्लास्टरदीवारों पर तुम्हारेहाथों से किए निशानसब वैसे ही रख छोड़े हैतुम्हारी गाड़िया तुम्हारे खिलौनेसब रखे है संभाल क्योंकिमुझे पता है…

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एक दो तीन चार

एक छोटे कस्बे में,शाम ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। एक घर के बाहर कुछ बच्चियां लगड़ी टांग खेल रही हैं। एक दो तीन चार… (गिट्टियां फेकने और…

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बेटा

एक प्यारी सुहानी सुबह, बड़े से पार्क के बाहर,एक 5-6 साल की लड़की सुंदर से कपड़ों में अपने पिता के साथ खड़ी है,पिता फटे पुराने गंदे कपड़ों में हैउसके हाथ…

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जिन्दगी क्या ही है गीत

जिंदगी क्या ही हैमुझको बहती नदी सी लगेधूप भी है छांव भीबस तेरी कमी सी लगेजिंदगी क्या ही हैमुझको बहती नदी सी लगेधूप भी है छांव भीबस तेरी कमी सी…

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