आप भी पागल हैं।

पागल होना बड़ा कठिन हैहां! सही सुना आपने,ये आसान नहीं है किबस सुनना अपनी,और अपने मन की ही करते जाना।अपने में ही खुश रहना,और किसी को खुश न कर पानाये…

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रूटीन (अंतिम भाग)

मैने जल्दी से फोन की टॉर्च जलाई , फिर खिड़की का पर्दा हटाया। बाहर से कुछ रोशनी आनी शुरू हुई। फोन की टॉर्च बंद की, तभी बाहर से बहुत ही…

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लखनऊ मेट्रो

‘आज तो ऑफिस के लिए लेट हो जाऊंगा’कहते हुए मैं मुंशीपुलिया मेट्रो स्टेशन के बाहर बनी एस्केलेटर की सीढ़ियों पर तेजी से चढ़ने लगा। चूंकि मैं लेट हो रहा था…

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चूहा

ताला बंद हो चुका था। ऊषा आंटी ने धीरे से अपनी कमर को घुमाया, ‘घर्र-घर्र-कट’ की आवाज जोर से आई, आवाज को सुन सभी सजग हो गए, पर फिर उन्हें…

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भूख

कल भी कुछ खाने को नसीब नहीं हुआ था, और आज? आज भी दोपहर आधी से ज्यादा बीत चुकी थी, पर कुछ भी नहीं मिला था। और ये दोपहर! ये…

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रूटीन (भाग-2)

     मैने पूरे पर्दे को एक साइड किया और बाहर देखने लगा। बाहर आसमान में बिजलियां ऐसे चमक रहीं थीं जैसे डिस्को लाइट चमकती हों। फोन उठाकर देखा, उसमें नेटवर्क…

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रूटीन (भाग -1)

ये था मैं!एक मिनट, आप मुझे देख तो नहीं पा रहे होंगे, मुझे ही अपना विवरण देना होगा। तो हां जनाब, ये था मैं— चढ़ी हुई आँखें, बढ़ी हुई तोंद…

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अकेला

अकेला,डरता,पर आगे बढ़ताआगे क्या मोड़ ले राह यह सोच कर सिहरताअकेला, डरता,पर आगे बढ़ताकुछ जोड़ताकुछ तोड़ताकुछ देखकर मुख मोड़ता कुछ पा लेताकुछ छोड़ताहूं राह में बस दौड़ताअकेला, डरता,पर आगे बढ़ता…

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जैसा तुमने छोड़ा था

तुम्हारे जाने के बादजैसा था वैसा ही रखा हैघरवो उखड़ा प्लास्टरदीवारों पर तुम्हारेहाथों से किए निशानसब वैसे ही रख छोड़े हैतुम्हारी गाड़िया तुम्हारे खिलौनेसब रखे है संभाल क्योंकिमुझे पता है…

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एक दो तीन चार

छोटे से गांव में ये शाम भी बाकी शाम जैसी ही थी, शांत और अपनी गति से चलने वाली, गांव के पास में बहती हुई नदी में मानो डूबता हुआ…

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