देश की आवास समस्या

मुनिवर, कुछ रास्ता निकालिए। बेचारे कितनी प्रार्थना करते हैं। आप तो महर्षि हैं। आप की तो तीनों देवताओं से ट्यूनिंग भी अच्छी है। कोई तो उपाय करिए।आप लोग चिंता न…

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रविवार

जब हफ्ते की भागदौड़मिलती है रविवार सेआता है समझकी जीवन क्या हैसिर्फ भागना दौड़ना नहींठहरकर देखना भी हैपर ये ठहराव नहीं हैबस एक पड़ाव है जीवन काक्योंकि रविवार भी जानता…

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फिल्म फेस्टिवल 3

अगला दिन क्योंकि रविवार था तो मैं सुबह से ही फिल्म फेस्टिवल में था। सुबह 9:00 बजे से स्क्रीनिंग की शुरुआत होनी थी पर मैं 8:45 पर ही वहां पहुंच…

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फिल्म फेस्टिवल 2

फिल्मों के ही सपने देखते-देखते अगले दिन आंख खुली। उस दिन तो सुबह से ही फिल्म दिखाई जानी थी, पर ऑफिस होने के कारण शाम को ही जा सका।पहली मूवी…

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फिल्म फेस्टिवल 1

पिछले रविवार की सुबह साइकिल की सैर करते हुए मन हुआ कि आज किसी नए रास्ते का रुख किया जाए तो चलाते-चलाते साइकिल दूसरी तरफ मोड़ ली। रास्ता अनजान था,…

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चप्पल सुंदरी

हट! हट यहाँ से!पता नहीं कहाँ-कहाँ से चले आते हैं। खुद तो गंदी हो और मुझे भी गंदी किए जा रही हो। कभी आईने में अपनी शक्ल देखी है? कभी…

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टूटी छत

जून की लू के थपेड़ों से भरी हुई दोपहर, सीमेंट की चादर से बनी छत की दरार से आती हुई धूप मनोज के चेहरे पर पड़ती हुई  उसकी नीद में…

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पहले का आनंद

"पहला" शब्द कितना मनमोहक होता है, जिसके आगे लगता है उसके महत्व को बढ़ा देता है, अब चाहे वह पहला काम हो, कार हो, घर हो या कुछ और।यहां बात…

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शब्द

शुरुआत का समय, सोचा लिखना चाहिए, विचार तो बहुत मन में आते है पर क्या-क्या पता नहीं । बड़े अजीबो- गरीब, स्वप्न भी कहानी या चलचित्र के समान प्रतीत होते।…

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गुब्बारे

गुब गुब गुब गुब्बारेदेखो देखो है ये कितने सारेगुब गुब गुब गुब्बारेदेखो देखो है ये कितने सारे कुछ कुछ कुछ नीचे पड़े हैंकुछ कुछ कुछ ऊंचे उड़ चले हैसंग संग…

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