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रविवार

जब हफ्ते की भागदौड़
मिलती है रविवार से
आता है समझ
की जीवन क्या है
सिर्फ भागना दौड़ना नहीं
ठहरकर देखना भी है
पर ये ठहराव नहीं है
बस एक पड़ाव है
जीवन का
क्योंकि रविवार भी जानता है
आगे फिर पूरा हफ्ता है
और ये निराशा की बात नहीं है
ये हमें देता है
नई ऊर्जा
नया विश्वास
और आगे बढ़ने का साहस
और बताता है
पड़ाव नजदीक है
शांति का

ये मृत्यु की तरह है
वो भी ठहराव नहीं है
बस एक पड़ाव है
उसके पीछे भी कुछ था
आगे भी कुछ है
बस बीच में
रविवार की तरह
आती है मृत्यु
लेकर
शांति-सुकून
और एक नई उम्मीद
आगे के लिए

और जब आती है मृत्यु
लगता है अंत है ये
गति का
और पता चलता है
जीवन ही नहीं
मृत्यु भी सत्य है
पर नहीं
तुम नहीं जानते
शुरुआत है ये

नदी जानती है
सिर्फ बहना नहीं है
एक दिन समुद्र में मिलना भी है
पर समुद्र ही जानता है
वो यहां भी नहीं रुकती
पर दोनों नहीं जानते
पूरा चक्र
नदी के लिए समुद्र ठहराव है
पर समुद्र के लिए
ये यात्रा की शुरुआत

चक्र बस चलता है
कोई नहीं जानता
मुक्ति है क्या
पर है रविवार
शांति के लिए
मृत्यु की तरह

This Post Has 2 Comments

  1. पवन sahu

    Very nice

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