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घड़ी घड़ी गीत

आंखें तुम्हारीदेखो ये मुझपेआके हैं पड़तीघड़ी घड़ी नज़रे बचा केजाऊं मैं कैसेतुम हो यहां पेखड़ी खड़ी आंखें ……बड़ी बड़ी मुझपे ……पड़ी पड़ी आंखें …… बड़ी बड़ी मुझपे...

ये जो है रात गीत

ये जो है राततेरे साथबिताई मैने सिर्फ तुझको ही नहीं तेरी रूह भीपाई मैंने ये जो है राततेरे साथबिताई मैनेसिर्फ तुझको ही नहीं तेरी रूह भीपाई मैंने बरसता सावन भीजो न भिगो है पायाबरसता सावन भी जो न भिगो है...

सर पर पैर, नहीं जूता

कान उमेठकर तेजी से मैं उसे लिये चला जा रहा था कि तभी उस लाल पारी की लालिमा ने मुझे रुकने पर मजबूर कर दिया और भी लोग जहां थे वहीं ठिठक गए। उसकी लालिमा है ही ऐसी — पर वो आकर्षक नहीं, भय के कारण होती...

The wish cat

शाम का समय दिन अब जाने को है, रात इंतज़ार कर रही है अपनी बारी की। शाम,जो इन दोनों की साथी है, अभी अपनी मौज में है — और अपनी मौज में एक और आदमी भी है, चला जा रहा है रास्ते पर, घर की ओर, खुशी-खुशी, कोई...

देश की आवास समस्या

मुनिवर, कुछ रास्ता निकालिए। बेचारे कितनी प्रार्थना करते हैं। आप तो महर्षि हैं। आप की तो तीनों देवताओं से ट्यूनिंग भी अच्छी है। कोई तो उपाय करिए।आप लोग चिंता न करें, ये डिपार्टमेंट तो वैसे भगवान विष्णु...

रविवार

जब हफ्ते की भागदौड़मिलती है रविवार सेआता है समझकी जीवन क्या हैसिर्फ भागना दौड़ना नहींठहरकर देखना भी हैपर ये ठहराव नहीं हैबस एक पड़ाव है जीवन काक्योंकि रविवार भी जानता हैआगे फिर पूरा हफ्ता हैऔर ये...

फिल्म फेस्टिवल 3

अगला दिन क्योंकि रविवार था तो मैं सुबह से ही फिल्म फेस्टिवल में था। सुबह 9:00 बजे से स्क्रीनिंग की शुरुआत होनी थी पर मैं 8:45 पर ही वहां पहुंच चुका था। पहुंचने पर देखा कि कई स्कूल के बच्चे भी वहां आ...

फिल्म फेस्टिवल 2

फिल्मों के ही सपने देखते-देखते अगले दिन आंख खुली। उस दिन तो सुबह से ही फिल्म दिखाई जानी थी, पर ऑफिस होने के कारण शाम को ही जा सका। पहली मूवी जो दिखाई गई थी वह थी “एट लास्ट वी सेड गुड बाय”...

फिल्म फेस्टिवल 1

पिछले रविवार की सुबह साइकिल की सैर करते हुए मन हुआ कि आज किसी नए रास्ते का रुख किया जाए तो चलाते-चलाते साइकिल दूसरी तरफ मोड़ ली। रास्ता अनजान था, पर शहर तो अपना ही था और ये तो कहा ही जाता है कि दुनिया...