Recent Posts
समय होने वाला है, फिर वही किच-किच, मैं तो परेशान हो गई हूं। इतने दिन शांति थी अब फिर वही शुरू, एक तो वैसे ही हथौड़े से सर झन्ना जाता, उस पर से इनकी चिल्ल-पो। मुझसे अच्छी तो शहर वाली है, वो तो एकदम...
जिंदा नहीं हूँ, मैं मन हूँ कई बार मर चुका हूँ। ना ही रात में ना ही अकेले में भरी दोपहर, भरे मेले में अपना दम घोट चुका हूँ जिंदा नहीं हूँ, मैं मन हूँ कई बार मर चुका हूँ। किसी की बात पर कभी हालत पर...
किस्से- कहानी बहुत ही हैं सारी कुछ तेरी ज़ुबानी कुछ मेरी ज़ुबानी। कहनी बहुत तन्हा जो रातें गुज़ारी कुछ तेरी ज़ुबानी कुछ मेरी ज़ुबानी। दिल भी धड़कता है तेरे लिए सांसे भी चलती है तेरे लिए मैं तू हुआ हु...
उसके बचपन में अपना बचपन खोजता हूँ नहीं,उसके लिए नहीं, मैं अपने लिए सोचता हूँ। चार पहियों की गाड़ीतीन पहियों वाला तांगा दो टांगों वाला बंदर एक सींग वाला घोड़ाये सब अपनी पसंद का देखता हूँ नहीं...
सांसे चल रही हैं या नहीं ई तो देखो।देख तो लिया कै बार कहा ना, नही चल रही है, गए ये।सबको खबर देनी होगी।सब तो है बस छोटकि बाहर गई है। घर में झौवा भर काम पड़ा है ऊ नही दिखता है बस चकल्लस करने को दे दो।...
इन ऊंचे ऊंचे फ्लैटों में रहना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। ये बिल्डिंगे तो ऊंची ऊंची हैं पर यहां के लोगो के दिलो के बारे में ऐसा कहना संशय भरा है। पर क्योंकि यह शहर का अभिन्न भाग है जहां लोग ज्यादा और...
पतंगे !उड़ती फिरती बहती जातीजैसे जड़ रहितचंचल उड़ान,स्पर्श पवन का और बढ़ाता जिज्ञासादेखें, छूं लें सारा आसमान। पर बंधी कहीं हैं यें भी डोर सेलगता उनको बंधन ये,काश ये डोरी टूटे तो मुक्त गगन की हो लें...
नया साल कुछ नया नहीं,कुछ बचा रहा कुछ बचा नहींकुछ पास रहे कुछ पास नहीं कुछ भूल गए कुछ याद नहींनया साल कुछ नया नहीं कुछ सोचा था कुछ किया नहीं, कुछ पाया था पर रहा नहीं, कुछ ख्वाब से थे कुछ आस सी थी, कुछ...
नींद बड़ी अच्छी आती है जब मैं अपने घर सोता हूं पर थोड़ी खुशबू आती है जब मैं अपने घर सोता हूं। एक नदी भी जाती है छोटी छोटी मछली आती है तारो का भी लगता मेला दिन में सूरज से होता उजेला हवा भी अच्छी आती...
