चप्पल सुंदरी

हट! हट यहाँ से!पता नहीं कहाँ-कहाँ से चले आते हैं। खुद तो गंदी हो और मुझे भी गंदी किए जा रही हो। कभी आईने में अपनी शक्ल देखी है? कभी…

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टूटी छत

जून की लू के थपेड़ों से भरी हुई दोपहर, सीमेंट की चादर से बनी छत की दरार से आती हुई धूप मनोज के चेहरे पर पड़ती हुई  उसकी नीद में…

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मिन्नतें

 समय होने वाला है, फिर वही किच-किच, मैं तो परेशान हो गई हूं। इतने दिन शांति थी अब फिर वही शुरू, एक तो वैसे ही हथौड़े से सर झन्ना जाता,…

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टाईलेट

सांसे चल रही हैं या नहीं ई तो देखो।देख तो लिया कै बार कहा ना, नही चल रही है, गए ये।सबको खबर देनी होगी।सब तो है बस छोटकि बाहर गई…

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वो कौन था

 इन ऊंचे ऊंचे फ्लैटों में रहना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। ये बिल्डिंगे तो ऊंची ऊंची हैं पर यहां के लोगो के दिलो के बारे में ऐसा कहना संशय भरा…

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