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भागता दौड़ता राह को रौंदता कुछ मिल गया राह में कुछ पीछे अपने छोड़ता यहां कोई भी ठहरा नही है ये शहर मेरा नही है। भीड़ की दीवार है आपाधापी बेशुमार है सुबह भी चल रहे थे सांझ भी डेरा नही है। ये शहर मेरा...
एक शाम चाट की दुकान पर बताशे खाते हुए एक बहुत ही छोटी बच्ची दिखी शायद उसकी उम्र 4-5 साल रही होगी पर अपनी उम्र से लगभग आधी 2 साल की मासूम सी बच्ची लग रही थी। इस ठंड भरे मौसम में भी हाफ पैंट में थी वो...
बस इतनी सी बात हो देखूँ तुझे तू भी देख ले चाहे कैसे भी हलात हो बस इतनी सी बात हो चाहे धूप हो या छांव हो या घनघोर अँधेरी रात हो बारिश की बूंदो का सावन जाड़े कि सर्दी की शीतन उगते सूरज की बेला हो या...
कभी नम हैं आंखे कभी हैं चमकती कभी गुम हैं लब कभी बाते खनकती मुख के हर एक भाव का अलग अंदाज है तुझमें कुछ तो बात है कभी है अटकती कभी है चहकती कभी शिखर कभी शून्य मे भटकती मन में समेटे ना जाने कितने राज...
ऐ चन्द्र तुम्हारी किरणों में सब कुछ निर्मल सा लगता है सब कहते है कि अंधकार है पर मुझको तो सब ही दिखता है। रूप रंग का भेद मिटा कर तुम सबको सम कर देते हो दिन भर की जितनी पीड़ा हो सबको तुम हर...
हुई शाम थी, बैठा एक दिन सोचा कुछ तो लिख ही दूंगा मन हि मन में चलने वाली दिल हि दिल में रहने वाली कुछ बातो को काग़ज़ पर तो मै रख ही दूंगा सोचा कुछ तो लिख ही दूंगा सब द्वेष,घृणा,अपकार,क्रोध मन के सारे...
मेरी कहानी में अब तुम्हारा भी हिस्सा है कच्चा कच्चा ही सही पर बड़ा ही अच्छा किस्सा है समुंदर सा गहरा कभी...
कुछ छूट गया ऐसा लगता है तू रूठ गया ऐसा लगता है आंखे भी एकदम मौन रही शब्दों पर जैसे बंधन थे वाणी भी एकदम जड़ ही रही भाव भी जैसे मृत से थे हृदय टूट गया ऐसा लगता है तू रूठ गया ऐसा लगता है मन तो बस...
अच्छी सी सच्ची सी प्यारी सी कच्ची सी हल्की सी फुल्की सी छोटी सी बच्ची सी झूठी नहीं वो तो एकदम ही सच्ची सी मुच्ची सी पुच्ची सी थोड़ी सी टुच्ची सी ज्ञानी सयानी सी सबकी वो रानी सी छोटी नहीं वो तो...
