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बेटा

एक प्यारी सुहानी सुबह,
बड़े से पार्क के बाहर,
एक 5-6 साल की लड़की सुंदर से कपड़ों में अपने पिता के साथ खड़ी है,
पिता फटे पुराने गंदे कपड़ों में है
उसके हाथ में एक पुराना झोला है।

लड़की
(आश्चर्य से)
हा!!!! बाबा कितना बड़ा गेट है?
पिता
ह्म्म
लड़की
घर से कितना दूर है बाबा? कौन सी जगह है ये बाबा
पिता
ये बगीचा है बेटा, चलो अंदर चलो

दोनों लोग अंदर जाते है, लड़की चकित होकर सब तरफ देखती है।

लड़की
(झरने की तरफ उंगली दिखा कर)
बाबा वो क्या है?

पिता
वो फ़ौवारा है।

लड़की
फ़ौवारा क्या होता है

पिता
जब पानी ऊपर से गिरता है तो उसे फ़ौवारा कहते है

लकड़ी
अच्छा

दोनों आगे जाते है,
बगीचे की हरियाली पेड़ पौधे पंछियों के चहचहाने की आवाजें

लड़की
बाबा ये कितनी अच्छी जगह है,
(लड़की अपनी ड्रेस पकड़ कर दिखाती हुई)
और ये कपड़ा कितना सुंदर है,
बाकी सबको क्यों नहीं लाए बाबा?

पिता
आज तुम्हारा जन्मदिन है तो तुमको लाए है, जब उनका होगा तो उनको भी लाएंगे।

लड़की
जन्मदिन? वो क्या होता है?

पिता
जब कोई पैदा होता है तो उसे जन्मदिन बोलते है

लड़की
पैदा मतलब?

पिता
जब मां के पेट से निकलते है तो उसे पैदा होना बोलते है।

लड़की
(चौंकते हुए)
हैं? मै मां के पेट से निकली हूं?

पिता
हां

लड़की
और सोनी दीदी,

पिता
हा वो भी

लड़की
और सौम्या दीदी

पिता
हां वो भी

लड़की
और पूजा दीदी

पिता
हा वो भी

लड़की
और…

पिता
(बीच में बोलते हुए)
हां हां तुम्हारी सारी बहने पेट से ही आई है

लड़की
सच्ची?

पिता
हां

लकड़ी
मां के पेट के अंदर कितने लोग रहते है बाबा

पिता
लोग नहीं रहते है, बच्चे रहते है

लड़की
और कितने बच्चे हैं मां के पेट में?

पिता
बस एक तुम्हारा भाई आ जाए, बस उतने तक

लड़की
(आश्चर्य से)
भाई!!! मेरा भाई,
कब आएगा बाबा मेरा भाई(खुशी से)

पिता
पता नहीं बेटा

लड़की
आप ले कर आएंगे न?

पिता
हां

लड़की पिता की उंगली पकड़कर नीचे खींचती है , पिता नीचे बैठता है, लड़की उसे गले से लगा लगा लेती है

लड़की
आप कितने अच्छे हो बाबा

फिर दोनों आगे बढ़ते है, पार्क में झूले लगे है बच्चे खेल यही है, लड़की भी दौड़कर वहां जाती है खेलने, पिता खड़े होकर देखता है। लड़की अलग अलग झूले पर खेलती है।पिता पास में घास पर बैठ जाता है।

कुछ देर बाद
लड़की पिता के पास आती है।

लड़की
बाबा, भूख लग रही है

पिता झोले में से कागज में लिपटा हुआ कुछ खाने को निकलता है। लड़की उसे खाती है और फिर खेलने चली जाती है।
कुछ समय बाद, शाम होने वाली है।
लड़की पिता का हाथ पकड़े चल रही है

लड़की
बाबा घर कब चलेंगे

पिता
चलेंगे बेटा

लड़की
कब बाबा?

पिता
चलते है , आओ यहां बैठते है
( दोनों एक बेंच पर बैठते हैं)

कुछ देर बाद

लड़की
बाबा! घर

पिता
ह्म्म

पिता बेंच से उठता है, अपने झोले में से पानी की पुरानी बोतल निकलता है और बेंच पर रखता है,

पिता
बेटा तुम यहीं बैठो, मै अभी आ रहा हूं

लड़की
कहा जा रहे है बाबा

पिता
बस अभी आ रहे हैं

लड़की
जल्दी आना बाबा

पिता
ह्म्म

लड़की बोतले को पकड़कर अपने पास करती है, पिता जाता है, पिता चलते चलते गेट के बाहर चला जाता है।

कुछ देर बाद शाम गहराने लगती है, लड़की बेंच पर ही बैठी हुई है।

लड़की
(रोते हुए)
बाबा!! बाबा!!

लड़की बोतले को कस के पकड़कर जोर जोर से रोती है और अपने पिता को बुलाती है, पर कोई  नहीं आता।

This Post Has 6 Comments

  1. Niyamtullah (Sonu)

    बेहद शानदार भैया जी लेकिन ये कहानी अभी अधूरी है दुआ करेंगे कि वो समय आने पर कहानी को पूरा किया जा सके।

  2. Umesh Jaiswal

    Uss pita ki intensity kya thi?
    Kya wo kisi wajah se nahi aa saka ya uss bechari ladki ko akele hi chhor kar chala gaya?

    1. Vijay Kumar Jaisawal

      उसका पिता उसे वहाँ छोड़ने ही आया था। बेटे की चाहत में उससे पहले उसकी कई बेटियाँ हो चुकी थीं। गरीबी और अशिक्षा के कारण आज भी लोग बेटियों को बोझ समझते हैं। वह भी वैसा ही कर रहा था।

      पर यहाँ उस पिता की भावनाएँ भी दिखती हैं, जब वह उसे पहली और आख़िरी बार ही सही, उसके जन्मदिन पर उसे पार्क ले जाता है और दिन भर उसकी मनपसंद चीज़ें करवाता है। उसे अच्छे कपड़े पहनाता है,यह सोचकर कि जिसे भी वह मिलेगी, वह उसे अच्छे घर की समझकर अपना ले।

      वह उसे किसी खराब जगह भी छोड़ सकता था, पर उसने ऐसा नहीं किया। शायद वो भी अपनी बेटी से उतना ही प्यार करता था पर मजबूर था।

  3. Umesh Jaiswal

    Sayad mujhe isme uss garib pita ki majboori dikh rahi hai jo halato se haar kar apni beti ko iss beraham duniya me akele jeene ke liye chhor gaya.
    Lekin use aisa nahi karna chahiye tha 😢

    1. Vijay Kumar Jaisawal

      मजबूरी के साथ साथ यहां समाज की सोच भी जिम्मेदार है जो सिर्फ बेटों को ही आधार बनाती है। कहावत भी है कि बेटियां नसीब और बेटे दुआओं से आते हैं। जिस समाज में ऐसी सोच रहेगी वह बेटे की चाहत में बेटियां पैदा होती रहेंगी और कभी जन्म से पहले ,कभी जन्म के समय ,कभी उसके बाद कहीं न कहीं छोड़ी ही जाती रहेंगी।

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