बचपन
उसके बचपन में अपना बचपन खोजता हूँ नहीं,उसके लिए नहीं, मैं अपने लिए सोचता हूँ।चार पहियों की गाड़ीतीन पहियों वाला तांगा दो टांगों वाला बंदर एक सींग वाला घोड़ाये सब अपनी पसंद का…
उसके बचपन में अपना बचपन खोजता हूँ नहीं,उसके लिए नहीं, मैं अपने लिए सोचता हूँ।चार पहियों की गाड़ीतीन पहियों वाला तांगा दो टांगों वाला बंदर एक सींग वाला घोड़ाये सब अपनी पसंद का…
सांसे चल रही हैं या नहीं ई तो देखो।देख तो लिया कै बार कहा ना, नही चल रही है, गए ये।सबको खबर देनी होगी।सब तो है बस छोटकि बाहर गई…
इन ऊंचे ऊंचे फ्लैटों में रहना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। ये बिल्डिंगे तो ऊंची ऊंची हैं पर यहां के लोगो के दिलो के बारे में ऐसा कहना संशय भरा…
पतंगे !उड़ती फिरती बहती जातीजैसे जड़ रहितचंचल उड़ान,स्पर्श पवन का और बढ़ाता जिज्ञासादेखें, छूं लें सारा आसमान।पर बंधी कहीं हैं यें भी डोर सेलगता उनको बंधन ये,काश ये डोरी टूटे तो मुक्त…
नया साल कुछ नया नहीं,कुछ बचा रहा कुछ बचा नहींकुछ पास रहे कुछ पास नहीं कुछ भूल गए कुछ याद नहींनया साल कुछ नया नहींकुछ सोचा था कुछ किया नहीं,कुछ…
नींद बड़ी अच्छी आती हैजब मैं अपने घर सोता हूंपर थोड़ी खुशबू आती हैजब मैं अपने घर सोता हूं।एक नदी भी जाती हैछोटी छोटी मछली आती हैतारो का भी लगता…
भागता दौड़ता राह को रौंदताकुछ मिल गया राह मेंकुछ पीछे अपने छोड़ता यहां कोई भी ठहरा नही हैये शहर मेरा नही है।भीड़ की दीवार हैआपाधापी बेशुमार हैसुबह भी चल रहे थेसांझ…
बस इतनी सी बात हो देखूँ तुझे तू भी देख ले चाहे कैसे भी हलात होबस इतनी सी बात होचाहे धूप हो या छांव हो या घनघोर अँधेरी रात होबारिश की बूंदो का…
कभी नम हैं आंखे कभी हैं चमकतीकभी गुम हैं लब कभी बाते खनकतीमुख के हर एक भाव का अलग अंदाज हैतुझमें कुछ तो बात हैकभी है अटकती कभी है चहकतीकभी…
ऐ चन्द्र तुम्हारी किरणों में सब कुछ निर्मल सा लगता है सब कहते है कि अंधकार हैपर मुझको तो सब ही दिखता है। रूप रंग का भेद मिटा कर तुम सबको सम कर देते…