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चूहा

ताला बंद हो चुका था।

ऊषा आंटी ने धीरे से अपनी कमर को घुमाया, ‘घर्र-घर्र-कट’ की आवाज जोर से आई, आवाज को सुन सभी सजग हो गए, पर फिर उन्हें ध्यान आया, ये तो ऊषा आंटी के एक्सरसाइज़ करने का समय है!

अंकल सैम ने ठंडी आह भरते हुए आंटी की तरफ देखा और बोले-
“अरे बस भी करो! दिनभर तो चलती ही रहती हो, अब और कितना पतला होना है तुम्हे?”


ऊषा आंटी ने बुदबुदाते हुए अपनी कमर को घूमना जारी रखा और सैम अंकल से बोली-
“तो क्या तुम्हारी तरह ठूंस ठूंस कर मोटी होती जाऊं? खुद से तो कुछ होता नहीं और मुझे भी अपने जैसा बनाना चाहते हो! चुप चाप बैठे रहो जहाँ हो।”

अंकल सैम की बोलती बंद हो चुकी थी, ऊषा आंटी से जीत पाना तो इस घर में किसी के बस की बात नहीं थी, बस उन्हें टक्कर देती थी तो सोनी ही।
सोनी मॉडर्न जमाने की थी, सभी से तेज तर्रार साथ सुंदर भी थी।
और अगर सही मायने में देखा जाए तो ऊषा आंटी ने सोनी को देखकर ही अपनी एक्सरसाइज की आवृति और गति को दुगुना कर दिया था। सोनी की चमक और उसका स्लिम ट्रिम बदन देखकर ऊषा आंटी को हमेशा खीज हो आती थी। पर सबसे ज्यादा ऊषा आंटी को दिक्कत थी तो वो थी सोनी की बातों से,जो जैसे कभी खत्म होने का नाम ही नहीं लेती थी।

      सोनी हमेशा बक बक ही करती रहती। कभी तो बेमतलब के गाने ही गाती, तो कभी फिल्मों के डायलॉग मारती, और कभी कभी तो बेफजूल के समाचार ही सुनना शुरू कर देती थी।

      असल में उससे ऊषा आंटी ही नहीं घर के सभी लोग परेशान थे। और उन लोगो में से ही एक थे दीवान जी। उनकी उम्र का ठीक ठाक अनुमान तो लगाना मुश्किल था पर घर में वो सबसे बुजुर्ग थे और घर के अधिकतर लोग उन्हें दादा जी कहकर बुलाते थे। खुद की प्रकृति और साथ ही ज्यादा बूढ़े होने के कारण वो कही आ जा नहीं सकते थे। और सोनी उन्हीं के सामने सब कुछ बड़बड़ाया करती थी। कितनी बार ही दीवान जी ने उससे कहा था पर वो अपने आगे किसी की सुनती ही नहीं थी। अंकल सैम को उससे ज्यादा कुछ परेशानी तो नहीं थी, उन्हें तो उसका गाना गाना बहुत अच्छा भी लगता था, पर हां कभी कभी उनकी नींद में सोनी की तेज आवाज खलल जरूर डाल देती थी

      अचानक सोनी ने फिर से अपनी बकबक शुरू कर दी थी, ऊषा आंटी ने उसकी तरफ देखा और अपनी कमर को और जोर से चलाने लगी तभी कट की आवाज से उनकी कमर ने जवाब दे दिया। अंकल सैम को हंसी आ गई। उनके लटकते हुए सफेद दांत बाहर को दिखने लगे थे। ऊषा आंटी ने जोर की एक ऐसी डांट अंकल सैम को लगाई कि वो अपना मुंह बंद करके बैठ गए।

      ऊषा आंटी ने अपनी कमर को सहलाते हुए अपनी नजर इधर उधर  दौड़ाई, पीछे कोने में उन्हें कोई खड़ा दिखाई दिया, ऊषा आंटी घूम कर उसको देखने लगी, कुछ देर बाद अंकल सैम की तरफ घूमते हुए उन्होंने कहा।

“ये कौन है? और यहां कैसे आ गई?”

अंकल सैम डाट खाने से मुंह फुलाकर बैठे थे, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
“अरे बोलो भी, या फिर से कुछ सुनना चाहते हो” ऊषा आंटी बोली

अंकल सैम के पास और कोई चारा नहीं था।

“तुमको तो अपनी एक्सरसाइज से ही फुर्सत नहीं है, तुम्हे कैसे पता चलेगा? कल ही तो आई है ये फूल!”
“फूल?”
“हां! फूल कुमारी! घर के लिए साफ सफाई के रखा गया है।”
“साफ सफाई के लिए?” ऊषा आंटी चौकी
“हां” अंकल सैम ने इत्मीनान से कहा
ऊषा आंटी थोड़ी हड़बड़ाई
“पर उसके लिए तो किसी और से बात चल रहीं थी न?
अरे क्या नाम था उसका?..
ड.. ड.. डस”
“अरे डस नहीं  – डस्टर” अंकल सैम मुस्कुराये
“हां  हां वही डस्टर! वो अजीब सा नाम वाला। ऐसा नाम भी कोई रखता है भला?”
“क्यों मेरा नाम भी तो सैम है , इस नाम के कारण ही तो तुम्हे मुझसे प्यार हो गया था।” अंकल सैम ने जल्दी से कहा
“चुप चाप बैठे रहो , बड़े आए है नाम से प्यार करवाने वाले। अरे! तब तुम कितने कूल लगते थे, उस समय सभी तुम पर मरते थे। मुझे तो वैसे भी कूल लोग पसंद थे इसी लिए तुम पर मेरी मति मारी गई। अब तो गैस छोड़ने के अलावा कुछ काम नहीं करते हो।”  ऊषा आंटी गुर्राई

अंकल सैम का मुंह लटक गया।
“खैर ये सब छोड़ो, वो डस्टर का बताओ उसका क्या हुआ?” ऊषा आंटी बोली।

“क्या हुआ,क्या? उससे बात नहीं बनी, अब जिसको आना था वो आ गया। जो है उसी से काम चलाओ।”  अंकल सैम ने थोड़ी नाराज़गी से कहा।

ऊषा आंटी का गुस्सा सातवें आसमान पर था।

“अरे कुमारी उमारी कोई काम ढंग से नहीं कर पाती हैं। दिन भर बैठी रहेगी अपना रोना लेकर, कोई डस्टर जैसा  रहता तो ठीक रहता। देखना ये मेरा काम कम करेगी, और मेरी नाक में दम ज्यादा। पहले का तुम्हे याद नहीं? वो जो आई थी!  हमेशा अपने बाल बिखराकर घूमा करती थी जगह-जगह, कभी  तुम्हारे ऊपर तो कभी मेरे ऊपर उसके बाल पड़े मिलते थे, और तो और एक बार सफाई के नाम पर दादा जी के मुंह में ही अपना बाल घुसेड़ दिया था, बेचरे कितने दिनों तक खांसते रहे थे। ये भी तो वैसी ही लग रही, देखो! देखो कैसे खड़ी है वहां पर महारानी की तरह?”

ऊषा आंटी फूल कुमारी की तरफ मुखातिब हुईं।
“ये फूल कुमारी! जा, अपना काम कर, यहां बैठने से कुछ नहीं होगा।”
“अरे! ऐसा मत डांटो उसे, आज तो काम पर पहला ही दिन है उसका” सैम अंकल हल्के से कुलबुलाये
हाथ फैलाते हुए ऊषा आंटी ने  अंकल सैम  की तरफ देखा।

“ ये लोग ऐसे ही ठीक रहते है। तुम ज्यादा मुंह मत लगाना उसको। हम लोगों की बराबरी कहां कर पाएंगे ये लोग”
“ठीक है बाबा ठीक है। नहीं लगाएंगे मुंह, अभी तुम तो अपनी कमर ठीक करो” अंकल सैम ने अनमने मन से कहा।

तभी कहीं से सोनी की आवाज आई

“ ए लड़की!!” हां हां तुझसे ही बोल रहीं हूं।
तू!!! हां तू!! क्या नाम है तेरा.. अ….. हां!  फूल कुमारी!  चल इधर आ जल्दी से, उन लोगो की बात पर ज्यादा ध्यान मत दे, यहां मेरी ही चलती है। किसी को कुछ जानना होता है तो मेरे ही पास आता है, तुझे भी कुछ पूछना रहे तो मुझसे ही पूछना इन लोगों से नहीं”

फूल कुमारी ने चौक कर सोनी की तरफ देखा।

“इधर तो आ जरा, देख मेरे आस पास कितनी गंदगी हो गई है। आ ज़रा इधर सफाई कर दे। आज मेरा गाना गाने का बड़ा मन हो रहा है” सोनी फिर से बड़बड़ाई

“लो! इनका आज गाने का मन हो रहा है” ऊषा आंटी बुदबुदाई
“अरे जोर से तो बोलो” अंकल सैम ने ऊषा आंटी की तरफ देखाते हुए कहा।

ऊषा आंटी ने अंकल सैम की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया।

ऊषा आंटी फूल कुमारी की तरफ मुड़ी
“ ए फूल कुमारी! तुम पहले यहां आओ। देखो इधर कितनी गंदगी है,पहले इसे साफ कर दो”
“ नहीं पहले यहां पर” दूसरी तरफ से सोनी तेज आवाज में बोली
“नहीं पहले यहां” ऊषा आंटी दोगनी आवाज में गुर्राई
“अरे जाने भी दो, और वैसे भी तुम्हारी एक्सरसाइज तो अभी बाकी भी है न। तब तक उसे पूरा भी कर लेना।” अंकल सैम ने धीरे से कहा

“तुम तो हमेशा उसकी ही तरफदारी करते हो” ऊषा आंटी बुदबुदाई
“अरे आज वो गाना गाएगी” सैम अंकल मुस्कुराते हुए बोले।

ऊषा आंटी ने मुंह बनाते हुए कहा
“एक तुम्ही को उसका गाना पसंद है बाकी किसी को वो फूटी आँख नहीं….”

तभी सोनी में मुंह से भयंकर चीख की आवाज निकली

“ये कौन सा राग छेड़ दिया इसने” ऊषा आंटी चौकी
सोनी चीखते हुए बोली
“चूहा!!!!भगाओ इसको,पिछली बार वो मेरे बालों को कुतरने ही वाला था। कोई तो भगाओ इसको जल्दी से!

फूल कुमारी !  ओ फूल कुमारी! जल्दी भगाओ इसको।
ये मेरे ही पास आता जा रहा है”

फूल कुमारी अपनी जगह से उठती है

सोनी की फिर से चीख निकाली है
“काट डाला!!!”
फिर सब तरफ सन्नाटा छा जाता है।
फूल कुमारी सोनी के पास जाती है, चूहे ने सोनी के बाल कुतर दिये थे, और सोनी डर के मारे बेहोश हो गई थी।

फूल कुमारी ने चूहे को दौड़ाया।

चूहा दादाजी के तरफ दौड़ा
दादाजी अपनी पुरानी आंखों से बस उसे अपनी तरफ भागते हुए आता देखते रहे। चूहा उनके ऊपर चढ़ गया। दादाजी हिल भी न सके। चूहे ने उनके बदन के सारे कपड़े कुतरने शुरू कर दिए।

फूल कुमारी दादाजी के पास पहुंची
चूहा अंकल सैम की तरफ लपका और जहां वो बैठे थे उसके नीचे घुस गया।
फूल कुमारी अंकल सैम के पास पहुंची और चूहे को ढूंढने लगी।

ऊषा आंटी चिल्लाई
“उनके पैर के पास”


अंकल सैम ने डर के मारे अपनी दुर्गंध युक्त वायु को प्रवाहित कर दिया। सभी लोग अपना नाक मुंह बंद करके इधर उधर भागने की कोशिश करने लगे। पर कोई फायदा नहीं। सोनी तो पहले ही बेहोश हो चुकी थी। दादा जी तो कही भागने की हालत में पहले से ही नहीं थे, ऊषा आंटी और फूल कुमारी अंकल सैम के पास ही होने के कारण उस प्रवाहित वायु के प्रकोप से नहीं बच पाए और जहां थे वहीं बेहोश हो गए।

ताला खुलता है।
एक आदमी और एक औरत घर में प्रवेश करते हैं।
औरत चीखते हुए  “अरे नहीं!!!  घर की क्या हालत हो गई है। आज फिर चूहे ने तांडव मचाया है, तुमसे कितनी बार कहा कि इसका कुछ इंतेज़ाम करो, पर नहीं!”
आदमी चौंकते हुए “अरे नहीं!!, टीवी का तार भी काट दिया इसने। ओह्फ़ फो!! फ्रिज की गैस भी लीक हो रही है लग रहा है। और तुमने ये झाड़ू को बीच में क्यों फेंक दिया था?”
औरत चिल्लाई “मैने उसे यहां नहीं फेंका था, उसे तो मै उस कोने में रख कर गई थी”
आदमी को बेडरूम के बाहर कपड़े के कुछ कतरन दिखाई दी।
“अरे!! अंदर देखो बेड को तो कुछ नहीं किया न चूहे ने?” आदमी चीखा
दोनो वहां पहुंचे, चूहे ने पूरे बेड को काट काट कर चीथड़ा कर दिया था।
दोनो वहीं सर पकड़ कर खड़े हो गए,
“सब तुम्हारी वजह से गया” औरत गुस्साई
आदमी झेंपते हुए मुसकाया
“सब कहां? पंखा तो बचा है न!”
ये कहते हुए आदमी ने पंखे का बटन दबाया,पंखा हल्का सा हिला, चर्र-मर्र-खड़ाक की आवाज की और धुँआ फेक कर बंद हो गया।
( क्रेडिट:ऊषा आंटी – ऊषा फैन
सैम अंकल – सैमसंग फ़्रिज
फूल कुमारी – फूल झाड़ू
सोनी – सोनी टीवी
दीवान दादाजी – बेड/सोफा
स्पेशल मेंशन – डस्टर – द डस्टिंग क्लॉथ)



( क्रेडिट:ऊषा आंटी – ऊषा फैन
सैम अंकल – सैमसंग फ़्रिज
फूल कुमारी – फूल झाड़ू
सोनी – सोनी टीवी
दीवान दादाजी – बेड/सोफा

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