बारिश (भाग-2)
बिजलियां ऐसे चमक रहीं थीं जैसे डिस्को लाइट। फोन उठाकर देखा, उसमें नेटवर्क का कोई नामोनिशान नहीं था। मन में सोचा—बारिश ही तो है, अभी बंद हो जाएगी। चलो, मौसम…
बिजलियां ऐसे चमक रहीं थीं जैसे डिस्को लाइट। फोन उठाकर देखा, उसमें नेटवर्क का कोई नामोनिशान नहीं था। मन में सोचा—बारिश ही तो है, अभी बंद हो जाएगी। चलो, मौसम…