नन्हा गुंडा
एक साधारण सा दिन था। घर के अंदर, बिस्तर पर लेटा हुआ कुंज अपनी दुनिया में मस्त था। कुंज की उम्र ढाई महीने थी। उसकी जिंदगी में सिर्फ तीन काम…
एक साधारण सा दिन था। घर के अंदर, बिस्तर पर लेटा हुआ कुंज अपनी दुनिया में मस्त था। कुंज की उम्र ढाई महीने थी। उसकी जिंदगी में सिर्फ तीन काम…
एक छोटे कस्बे में, शाम ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। गली के मोड़ पर एक छोटी सी लिट्टी-चोखा की दुकान धुएँ और घी की खुशबू से महक…