हज़ारों तारे है चांद भी है
फिर भी अंधेरा है
ऐ जिन्दगी
इस रात का क्या कोई सवेरा है
चल रहा है हर कोई आंख मूंदे
ना दो आवाज यहां हर शख्स बहरा है
अके मिलती है बस नदिया यहां पर
किसी ने ना पूछा समंदर तू कितना गहरा है
जो खो गए उन्हे भूल जाना ही अच्छा
पर वक्त जैसे उन पर आज भी ठहरा है
हज़ारों तारे है चांद भी है
फिर भी अंधेरा है
ऐ जिन्दगी
इस रात का क्या कोई सवेरा है
