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टाईलेट

सांसे चल रही हैं या नहीं ई तो देखो।
देख तो लिया कै बार कहा ना, नही चल रही है, गए ये।
सबको खबर देनी होगी।
सब तो है बस छोटकि बाहर गई है। घर में झौवा भर काम पड़ा है ऊ नही दिखता है बस चकल्लस करने को दे दो।
अरे ये सब छोड़ो वसीयत तो देखो कहा छुपा रखी है, देखें तो ये घर किसके नाम आया है, हम भाईयो में से किसकी किस्मत खुली है।
ढूंढना क्या है यहीं तखत के नीचे संदूक में रखा होगा।
ए मनोजवा देख तो..
अच्छे से देखना और कुछ तो नही है।
और का होगा, अलीबाबा का खजाना छुपा होगा का।
भैया बस ये एक कागज मिला है।
ला रे देखूं तो का लिखा है, अरे मेरा चश्मा तो कमरे पर ही रह गया,
ए बबुआ तू ही पढ़ कर देख न क्या लिखा है।
                        ॐ – राम- नमः शिवाय- ॐ 
मेरे सभी बच्चो को मेरा प्यार , जब तक तुम ये पढ़ पाओगे मैं इस दुनिया से जा चुका होऊंगा। मैने जीवन में बस जस कमाया है और कमाया हैं तो तुम बच्चो को। तुम बच्चे ही मेरा खजाना हो। ये धन दौलत सब बेफिजूल है। प्यार और इज्जत ही सबसे बड़ा धन है। पैसा आता है और चला जाता है पर प्यार और इज्जत हमेशा बनी रहती है।बचपन से तुम सब एक साथ रहते आए हो और …..
ई का लिखा है इसमें, कुछ काम का है भी या नहीं, कि बस कथा कहानी बाची है, ला दे रे हमका, काम का चीज छोड़ कर बाकी सब पढ़ता है। आखरी में देख ना का लिखा है।
…. इसलिए मैं घनश्याम वलद किसना अपने इस घर को अपने सारे बच्चों में बराबर-बराबर बांटता हूं।
का ? हैंय? फिर से तो पढ़।
….इसलिए मैं घनश्याम वलद किसना अपने इस घर को अपने सारे बच्चों में बराबर-बराबर बांटता हूं।
ई घर अब कैसे पांच लोगन मा बटी ऊ भी बराबर-बराबर।
पांच नही छह मा सुना नही लिखा है सब बच्चन मा बराबर-बराबर, मतलब छुटकि का भी हिस्सा है।
हैंय?  छुट्टकि तो लड़की है ,वाका कैसे मिली।
ई सब छोड़ो बाऊ जी के जाने के बाद घर के सबसे बड़े हम ही है, घर के सबसे आगे का कमरा हमारा, हमारे घुटने बहुत दर्द करते है आगे के कमरे से हमका आसानी होगी।
भैया हमको तो ये खिड़की वाला कमरा चाहिए हमको तो ताजी खुली हवा चाहिए ही चाहिए। 
हमको ये बगल वाला कमरा चाहिए पिछली दीवाली में ही तो कलर हुआ था। 
हमको ये रौशनदान वाला कमरा चाहिए।
बाऊ जी वाला कमरा हमको चाहिए।
हम लोगो ने तो अपना-अपना ले लिया, ई छुटकि को का मिली?
 उसको क्या करना है बिहाह करके चली जायेगी। उसको आंगन दे दो, जहां पर टाईलेट वाला कमरा है।
किरियाकरम करके आते समय हम तो ताला ले आयेंगे । संझा को सब अपने-अपने कमरे में सोना।
छुटकि कहां सोएगी?
उसको जो मिला है वहीं रहेगी। 
भैया ऊ टाईलेट वाले कमरा में कैसे रहेगी?  
अब किया भी का जा सकता है। बाऊ जी की अंतिम इच्छा थी तो कुछ तो देना ही होगा। वरना समाज वाले कहेंगे की बाप की अंतिम इच्छा नहीं पूरी की और बहन का हिस्सा खा गए। हम लोगो में ही अगर बांटा होता तो कोई न कोई अपने पास रख ही लेता। चलो अब सो जाओ नही तो छुटकि आ गई तो देखना। 
भैया आराम से बोलो ई छुटकि गलियारे में ही खड़ी है सुन लेगी तो। अरे सुन लेगी तो सुनने दो उससे डराइट है का। जो ऊका मिला है वही लेना पड़ेगा।
भैया ई टाईलेट में ताला कौन लगा दिया है? बहुत जोर से आई है। किसके पास है चाभी? 
हमारे पास नही है।
जरूर छुटकी ने लगाया होगा, वही तो रात में यहां सोई थी।
कहां गई है छुटकिया?
पता नही भइया फिर कहीं चकल्लस करने निकल गई होगी।
अब का होगा … ढूंढो रे उसको … आह….पेट में दर्द बढ़ता जा रहा है.. कोई तो बुलाओ उसको..
. पूं ..पूं …पूं …….

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