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मिन्नतें

 समय होने वाला है, फिर वही किच-किच, मैं तो परेशान हो गई हूं। इतने दिन शांति थी अब फिर वही शुरू, एक तो वैसे ही हथौड़े से सर झन्ना जाता, उस पर से इनकी चिल्ल-पो। मुझसे अच्छी तो शहर वाली है, वो तो एकदम एडवांस हो गई है,बस एक बटन दबाओ और काम हो गया। कुछ तो “ऐ आई” वाली हों गईं हैं, बटन भी नही दबाना पड़ता। पर मेरे तो भाग्य ही फूटे हैं जो यहां आ कर अटक गई हूं । कभी कोई इधर से भागता है तो कभी कोई उधर से, तंग आ गई हूं मैं तो। सुबह, दोपहर और जाने के समय तो अति ही हो जाती है। एक बार तो एक मुझसे इतना जोर से टकराया कि मैं चक्कर खा कर गिर पड़ी। इस बार आने दो, इतनी जोर से चिल्लाऊंगी कि सबके कान खराब हो जाएंगे। नहीं, नहीं, इस बार तो मैं एकदम चुप ही रहूंगी, तब ये लोग परेशान होंगे और मिन्नते करेंगे पर मैं फिर भी न बोलूंगी। 

             अभी तो कोई दिखता नहीं,आज तो पहला ही दिन है, पहले दिन कौन ही आता है, आज तो बादल भी थे, इस बार मानसून जल्दी भी तो आ गया है। इतने दिनों बाद किसका मन करता ही है, एक मै ही हूं जो तैयार होकर बैठ गई हूं। खैर आज न सही तो कल ही, आना तो है ही उनको, बकरे की मां कब तक खैर माना सकती है। चलो अच्छा ही हुआ एक तरीके से, मुझे एक दिन का और समय मिल गया। अब तो अच्छे से मजा चखाऊंगी।

            आज तो एक हफ्ता होने को आया है,कोई भी नहीं दिखता। कहां रह गए सब, इतना भी कोई आराम करता है भला?बारिश ने भी कहर ढा रखा है, इससे अच्छा तो मैं अंदर ही रहती। कलुआ ऐसे ही बोल रहा होगा,पर वो तो ज्यादातर उनके पास ही रहता है, वो छरहरी खड़िया भी एक दिन कह रही थी, कही वो खबर सच तो नहीं। नहीं !नहीं! ऐसा नहीं हो सकता। वो कलुआ और खड़िया की तो आपस में खूब छनती है, जरूर दोनों मिलकर मुझको पागल बना रहे होंगें। सब लोग जरूर आएंगे।  

            एऽऽऽ! तुम,तुम इधर आओ, बाहर से कहां जा रहे हो? तुमको यहां आना है न। आज तुम दिखे हो बाकी सब कहा हैं? अंदर क्यों नहीं आते? अरे सुनो तो , अच्छा मै कुछ न कहूंगी, जैसा तुम लोग कहोगे वैसी ही रहूंगी, एक बार तो आ जाओ। मेरा दिमाग सुन हुआ जा रहा है, तुम लोग नहीं आओगे तो हथौड़ा भी नहीं काम करेगा, मेरे कान तुम्हारी आवाजों को तरस रहे हैं, तुम लोगो की चिल्ल-पो के बिना रात में मुझे नींद नहीं आती है, कब से एक ही जगह लटके-लटके मेरी गर्दन अकड़ गई है, मै फिर से तुम लोगो की टक्कर से चक्कर खा कर कर गिर जाना चाहती हूं । तुम लोग नहीं आओगे तो ये स्कूल सूना हो जाएगा। मैं तुमसे मिन्नते करती हूं एक बार आ जाओ, बस एक बार…

(उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के विलय से कम छात्र वाले कई विद्यालय बंद किए जा रहे हैं, उन्हीं विद्यालय में से किसी एक में से बंधी घंटी अपने मन की व्यथा सुनते हुए मिन्नते कर रही है।)

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