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दरिया गीत

ये बहता दरिया भी काफी नहीं है
जो मेरे अंदर ही बाकी नहीं है
तेरी यादें आती हैं सागर की लहरों सी
अंदर से मुझको हिलाती सी रहती सी

मैं मिटता सा रहता
थोड़ा सा
थोड़ा सा
मिट के सवरता
थोड़ा सा
थोड़ा सा

बिखरता सा रहता
थोड़ा सा
थोड़ा सा
बिखरके चमकता
थोड़ा सा
थोड़ा सा

तेरी आहटे मुझको 
पागल सी करती हैं
आके ये मुझको
डराती सी रहती हैं
मैं डरता सा रहता
थोड़ा सा
थोड़ा सा
डर के संभलता
थोड़ा सा
थोड़ा सा

डूबूं उतरता
थोड़ा सा
थोड़ा सा
उतरके डूबूं भी
थोड़ा सा
थोड़ा सा


मैं मिटकर भी खुश हूं
बिखरकर भी खुश हूं
की मैं भी बहूंगा सागर की लहरों सा
मिलकर उनमें
मैं भी बनूंगा
तेरे ही जैसा
तेरे ही जैसा


ये बहता दरिया भी काफी नहीं है
जो मेरे अंदर ही बाकी नहीं है
तेरी यादें आती हैं सागर की लहरों सी
अंदर से मुझको हिलाती सी रहती सी
ये बहता दरिया भी काफी नहीं है
जो मेरे अंदर ही बाकी नहीं है

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