एक छोटे कस्बे में,शाम ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। एक घर के बाहर कुछ बच्चियां लगड़ी टांग खेल रही हैं।
एक दो तीन चार… (गिट्टियां फेकने और खिलखिलाने की आवाजें)
मां ( अंदर घर से)
पाती! ओ पाती ! आओ घर में शाम होने वाली है। कब तक खेलती रहोगी?
पाती
आ रही हूं मां, बस मै जीतने ही वाली हूं।
मां
नहीं बहुत हो गया अब जल्दी से आओ।
पाती
आ रही हूं !! मां बस दो मिनट और।
मां
अच्छा, जल्दी से आओ।
पाती गिट्टी फेंकती है।
पाती
एक दो तीन चार… ये !!!! मैं जीत गई, जीत गई।
अच्छा तो मै चली, कल मिलते हैं।
पाती घर के अंदर जाती है।
मां(किचेन से)
चाय तो बनाना सीख लो कम से कम।
पाती ( मां की बात पर ध्यान न देते हुए)
मां! आज मैने सबको हरा दिया लगड़ी टांग में।
मां
लंगड़ी टांग छोड़ और मै क्या कह रही हूं वो सुन।
पाती(झुंझलाते हुए)
क्या है मां?
मां
अरे कम से कम चाय तो बनाना सीख ले।
पाती(प्यार से मां को पकड़ते हुए)
सीख लूंगी मां! इतनी क्या जल्दी है?
रात हो जाती है।
घर के अंदर, रात बेड पर सोते हुए पाती और मां
पाती
मां ये गिट्टुक का खेल क्या टीवी पर नहीं आता कभी?
मां
नहीं तो क्यों?
पाती
आगर टीवी पर आता तो मैं भी जाती खेलने , मुझे इसमें कोई नहीं हरा सकता है मां,
मां
तू तो हर चीज में तेज़ है मेरी बेटी।
मां उसके माथे पर पप्पी लेती है।
मां
अब सो जा कल कुछ मेहमान आने वाले है।
दोनों लोग सो जाते है।
अगला दिन
पाती और कुछ लड़कियां बाहर खेल रही हैं।
एक दो तीन चार… ( गिट्टियां फेकने और खिलखिलाने की आवाजें)
मां
पाती ! जल्दी आओ घर में।
पाती
आती हूं मां बस थोड़ी देर और।
मां
नहीं !! जल्दी आओ मेहमान आ गए हैं।
पाती घर के अंदर जाती है।
घर के अंदर , मेहमान बैठे है, एक अधेड़ उम्र का लड़का और उसके मां बाप।
मां (किचेन से )
पाती, ले चल ये चाय साथ में मेहमानों के लिए।
दोनों मेहमानों के कमरे में पहुंचती है।
मां इशारे से चाय देने को कहती है, सभी चाय लेते है। पाती चाय रख कर मां के पास बैठती है।
मां
सबको नमस्ते करो बेटी।
पाती
नमस्ते दादाजी, नमस्ते दादीजी,
नमस्ते चाचाजी(लड़के की तरफ देखते हुए)
मां
ह्म्म वो चाचा नहीं है।
पाती
तो मां, ये अंकल कौन है?
मां
ऐसे नहीं बोलते, जा तू अंदर जा।
पाती वहां से बाहर आ जाती है।
मां (मेहमानों से)
आप लोग चाय नाश्ता कीजिए।
कुछ दिन बाद
एक छोटे कस्बे में, शाम ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे। एक घर के बाहर कुछ बच्चियां लंगड़ी टांग खेल रही हैं।
एक दो तीन चार… (गिट्टियां फेकने और खिलखिलाने की आवाजें)
घर के अंदर की खिड़की से, पाती साड़ी पहने हुए दुल्हन की तरह सजी हुई बाहर बच्चियों को खेलते देख रही है।
