चंद्रमा
ऐ चन्द्र तुम्हारी किरणों में सब कुछ निर्मल सा लगता है सब कहते है कि अंधकार हैपर मुझको तो सब ही दिखता है। रूप रंग का भेद मिटा कर तुम सबको सम कर देते…
ऐ चन्द्र तुम्हारी किरणों में सब कुछ निर्मल सा लगता है सब कहते है कि अंधकार हैपर मुझको तो सब ही दिखता है। रूप रंग का भेद मिटा कर तुम सबको सम कर देते…
हुई शाम थी, बैठा एक दिनसोचा कुछ तो लिख ही दूंगामन हि मन में चलने वालीदिल हि दिल में रहने वालीकुछ बातो को काग़ज़ पर तो मै रख ही दूंगासोचा…
मेरी कहानी में अब तुम्हारा भी हिस्सा है कच्चा कच्चा ही सही पर बड़ा ही अच्छा किस्सा है …
कुछ छूट गया ऐसा लगता हैतू रूठ गया ऐसा लगता हैआंखे भी एकदम मौन रही शब्दों पर जैसे बंधन थेवाणी भी एकदम जड़ ही रहीभाव भी जैसे मृत से थेहृदय टूट…
अच्छी सी सच्ची सी प्यारी सी कच्ची सीहल्की सी फुल्की सी छोटी सी बच्ची सीझूठी नहीं वो तो एकदम ही सच्ची सीमुच्ची सी पुच्ची सी थोड़ी सी टुच्ची सीज्ञानी सयानी सी सबकी वो रानी…
आसमा ने काले बादलों से ये कहाक्यों रहे हो तुम गरज क्यों रहे मुझे डराआयेगा जब सवेरा जाओगे तुम कहालेके अपनी बुंदुओं को लेके अपनी कालिमाआसमा ने भी नहीं खेली…
हज़ारों तारे है चांद भी हैफिर भी अंधेरा हैऐ जिन्दगी इस रात का क्या कोई सवेरा है चल रहा है हर कोई आंख मूंदे ना दो आवाज यहां हर शख्स बहरा है अके मिलती…
चुलबुली सी बुलबुली सी कभी मुरझाई कभी खिलखिली सीफूल सी अनेक रंग कीकभी अचल कभी जल तरंग सीवो है कठिन कभी वो सरल सीकभी एक युग कभी एक पल सीकभी नासमझ कभी वो…
ये जो रात अंधेरी काली हैवो मैंने भी तो काटी है कुछ रखी है कुछ बाटी हैपर मैंने भी तो काटी हैजब शाम हुई तब से सोचा थासूरज तो एक दिन…