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काले बादल

आसमा ने काले बादलों से ये कहा
क्यों रहे हो तुम गरज क्यों रहे मुझे डरा
आयेगा जब सवेरा जाओगे तुम कहा
लेके अपनी बुंदुओं को लेके अपनी कालिमा
आसमा ने भी नहीं खेली थी कच्ची गोलियां 
गरज गरज के कह रहे थे वे भी अपनी बोलियां
के प्यासी धरती की सुनी जब कहानियां 
इसलिए ही आया हूं मै ले के अपनी बुंदुओं को ले के अपनी कालिमा
शुरू हो गई थी जंग जैसी एक आसमा में 
बिजली की तलवार थी और बुंदुओं की गोलियां
पेड़ भी लहरा रहे थे शंख सा बजा रहे थे 
लड़ने को फिर निकली थी मेंढकों की टोलियां

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