जिंदगी क्या ही है
मुझको बहती नदी सी लगे
धूप भी
है छांव भी
बस तेरी कमी सी लगे
जिंदगी क्या ही है
मुझको बहती नदी सी लगे
धूप भी
है छांव भी
बस तेरी कमी सी लगे
पहाड़ भी है वादियां
नदी भी है और पेड़ भी
हवा भी है गगन बड़ा
है पंछियों का शोर भी
पहाड़ भी है वादियां
नदी भी है और पेड़ भी
हवा भी है गगन बड़ा
है पंछियों का शोर भी
जो न तू है
मुझको तो
ये धरती थमी सी लगे
जिंदगी क्या ही है
मुझको बहती नदी सी लगे
धूप भी
है छांव भी
बस तेरी कमी सी लगे
रास्ते ये जाते हैं
मै यहीं
पे हूं खड़ा
देखता निहारता
तुझको ही
हूं खोजता
रास्ते ये जाते हैं
मै यहीं
पे हूं खड़ा
देखता निहारता
तुझको ही
हूं खोजता
लबों पे ये
हंसी सी है
बस आंखों में
नमी सी लगे
जिंदगी क्या ही है
मुझको बहती नदी सी लगे
धूप भी
है छांव भी
बस तेरी कमी सी लगे
मंदिरों सी चमक
फूलों सी है महक
पूजा की थाल सी
गंगा की पवित्रता
मंदिरों सी चमक
फूलों सी है महक
पूजा की थाल सी
गंगा की पवित्रता
आंखें बंद करके देखूं
जब भी तुझे
घंटियों सी सजी तू लगे
जिंदगी क्या ही है
मुझको बहती नदी सी लगे
धूप भी है छांव भी
बस तेरी कमी सी लगे
