भागता दौड़ता राह को रौंदता
कुछ मिल गया राह में
कुछ पीछे अपने छोड़ता
यहां कोई भी ठहरा नही है
ये शहर मेरा नही है।
भीड़ की दीवार है
आपाधापी बेशुमार है
सुबह भी चल रहे थे
सांझ भी डेरा नही है।
ये शहर मेरा नही है।
छाव की तलाश है
धूल का गुब्बार है
बारिशों के गड्डे है और
शोर का संसार है
दिन अब उतना सुनहरा नही है
ये शहर मेरा नही है
मुसकुराहटे नकली सी है
भाव का अभाव है
दिल में कुछ जबां पे कुछ
एक सा चेहरा नहीं है
ये शहर मेरा नही है
उजाले डराते है
शब्द शोर लगते है
रंग और रौशनी तो बहुत है
वैसी होली और दशहरा नही है
ये शहर मेरा नही है।
मशीनों की भीड़ है
माया का जंजाल है
सुबह की धूप, ओस की बूंदे
चिड़ियों का बसेरा नही है
ये शहर मेरा नही है।
