तुझमें कुछ तो बात है

 कभी नम हैं आंखे कभी हैं चमकती

कभी गुम हैं लब कभी बाते खनकती

मुख के हर एक भाव का अलग अंदाज है

तुझमें कुछ तो बात है

कभी है अटकती कभी है चहकती

कभी शिखर कभी शून्य मे भटकती

मन में समेटे ना जाने कितने राज है

तुझमें कुछ तो बात है

कभी आग सी कभी राख सी 

गुड से भी मीठी मिठास सी

मन करे तो दिल खोल दे

रिमझिम गिरती बरसात सी

अलग ही लगता मिज़ाज है

तुझमें कुछ तो बात है

एक किरण सी अंधकार मे 

प्राणवायु निष्प्राण हृदय की

हर्षित मुख चंचल काया है

हर रूप तुम्हरा खास है 

तुझमें कुछ तो बात

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