बंधन-मुक्ति
पतंगे !उड़ती फिरती बहती जातीजैसे जड़ रहितचंचल उड़ान,स्पर्श पवन का और बढ़ाता जिज्ञासादेखें, छूं लें सारा आसमान।पर बंधी कहीं हैं यें भी डोर सेलगता उनको बंधन ये,काश ये डोरी टूटे तो मुक्त…
पतंगे !उड़ती फिरती बहती जातीजैसे जड़ रहितचंचल उड़ान,स्पर्श पवन का और बढ़ाता जिज्ञासादेखें, छूं लें सारा आसमान।पर बंधी कहीं हैं यें भी डोर सेलगता उनको बंधन ये,काश ये डोरी टूटे तो मुक्त…