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चांद तारे बालगीत

चांद तारे
सारे के सारे
आ जाओ मुट्ठी में,
तुमको सुनाऊं एक कहानी
गर्मी की छुट्टी में,

चांद तारे
सारे के सारे
आ जाओ मुट्ठी में,
तुमको सुनाऊं एक कहानी
गर्मी की छुट्टी में,

छोटा सा कछुआ
और एक खरगोश
रहते थे जंगल में,
हुई लड़ाई
कौन है भाई
तेज दौड़ने में,


सबने बोला
छोड़ो लड़ाई
हो जाए एक रेस
हम सब भी देखेंगे मिलकर
किसकी तेज है पेस

बोला खरगोश
ये तो मेरे काम
है चुटकी का
जीत मेरी है
निश्चित ही
देख लो तुम अपना

हुई सुबह
सारे आए
रेस देखने को
घोड़ा भालू बंदर हाथी
शेर हिरण और उसके साथी

चांद तारे
सारे के सारे
आ जाओ मुट्ठी में,
तुमको सुनाऊं एक कहानी
गर्मी की छुट्टी में,


फूंक बजाई
रेस शुरू की
आगे था खरगोश
कछुआ चलता धीरे–धीरे
पर कम नहीं उसका जोश

खरगोश बोला
अरे ये बूढ़ा
क्या जीतेगा रेस
पेड़ के नीचे
ज़रा सुस्ता लूं
फिर तेज़ करूंगा पेस

आँख लगी
तो नींद थी गहरी
खरगोश सो ही गया,
कछुआ अपनी
चाल से टिम टिम
आगे बढ़ता गया।

सबने देखा
कछुआ भाई
फिनिश लाइन के पास,
धीरे चलकर
जीत गया वो
हुई खरगोश की हार
हुई खरगोश की हार
हुई खरगोश की हार

चांद तारे
सारे के सारे
आ जाओ मुट्ठी में,
तुमको सुनाऊं एक कहानी
गर्मी की छुट्टी में,

सीखो सब
अकड़ न करना
मेहनत करना सच्ची
चलते चलते जीत मिलेगी
बात पते की अच्छी
ये है
बात पते की अच्छी

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