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घड़ी घड़ी गीत

आंखें तुम्हारी
देखो ये मुझपे
आके हैं पड़ती
घड़ी घड़ी


नज़रे बचा के
जाऊं मैं कैसे
तुम हो यहां पे
खड़ी खड़ी


आंखें ……
बड़ी बड़ी
मुझपे ……
पड़ी पड़ी
आंखें ……
बड़ी बड़ी
मुझपे ……
पड़ी पड़ी


बातें जो सोचूं
सोच न पाऊं
क्या क्या मैं कहके
चक्कर चलाऊं
बातें जो सोचूं
सोच न पाऊं
क्या क्या मैं कहके
चक्कर चलाऊं


सांसे……
चढ़ी चढ़ी
दिल की…..
धड़कन बड़ी
आंखें ……
बड़ी बड़ी
मुझपे ……
पड़ी पड़ी

मैं हकलाऊँ
कह भी न पाऊं
बोले है तू तो
खरी खरी


आंखें चुराऊं
जान बचाऊं
आफत कहां से
गले पड़ी


तुम तो……..
अड़ी अड़ी
मुझसे………
लड़ी लड़ी
आंखें ……
बड़ी बड़ी
मुझपे ……
पड़ी पड़ी

बातें भी गिनती है
रातें भी गिनती है
मन जो इसका करता है
सांसे भी गिनती है


लगता है मुझको कभी
मै भाग जाऊं
पर बिन तुम्हारे
रह भी न पाऊं
लगती है तू कभी
भली भली


जुल्फे.……  
उड़ी उड़ी
दिल की……
धड़कन बड़ी
आंखें ……
बड़ी बड़ी
मुझपे ……
पड़ी पड़ी

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