विजय कुमार जायसवाल
लेखक • कवि • संवेदनशील दृष्टिकोण के कहानीकार
“मनघड़ंतत” नामक इस ब्लॉग के माध्यम से विजय कुमार जायसवाल न केवल शब्दों को पंक्तियों में पिरोते हैं, बल्कि भावनाओं, विचारों और अनुभवों को जीवंत रूप देते हैं। उनके लेखन में वो सोंधी गंध है जो मिट्टी की याद दिलाती है, वो खामोशी है जो शहर की हलचलों में गूंजती है और वो संवेदना है जो पाठकों के अंतर्मन को छू जाती है।
विजय जी की रचनाएं न केवल पढ़ी जाती हैं, बल्कि महसूस की जाती हैं। उनकी कहानियों में सामाजिक यथार्थ है, उनकी कविताओं में आत्मा की पुकार है और उनके शब्दों में एक ऐसा आईना है जिसमें हर पाठक अपना अक्स देख सकता है।
पेशेवर रूप से एक भिन्न पथ पर होने के बावजूद, लेखन उनका पहला प्रेम है। वे मानते हैं कि “शब्द केवल अभिव्यक्ति नहीं, आत्मा की व्यथा हैं। लेखन सिर्फ कला नहीं, एक उत्तरदायित्व है।”
अगर आपने कभी खुद से सवाल पूछे हैं, जीवन के छोटे पलों को गहराई से महसूस किया है या खामोशियों में भाव तलाशे हैं — तो Manghadant.in आपके लिए एक घर जैसा होगा।
